Thursday, June 28, 2012

ऐ गम ! जा के ढूंढ़ ले कोई दूसरा घर

ऐ गम ! जा के  ढूंढ़ ले  कोई दूसरा घर  ,
दिल में आज से मेरे , बसेरा उनका होगा ..
 
इस घर का मालिक अब तू नही है ,वो हैं 
खाली अभी तुझे  , घर ये करना होगा ..
 
दीवानगी ने उनकी पागल किया है हमको 
पागलपन का कर्ज तुझको ही भरना होगा ...
 
घर ही तेरा अब ,  बेघर तुझे कर रहा है 
खातिर इस घर की बेघर तुझे रहना होगा ...
 
जिस तन्हाई की छाँव में तू पला-बढ़ा है 
उस तन्हाई को भी साथ तेरे रहना होगा ...
 
दर्द ने भी साथ तेरा  निभाया था अच्छा 
साथ अपने चलने को उसे भी कहना होगा ..
 
गर चले गये "वो "तो फिर याद आयेगा तू ,
मेहमान चंद पलों का,तुझको बनना होगा  ..
 
है नही बेनकाब तो, चेहरा " उनका " भी  
पर्दा हटने का मगर ,इंतजार करना होगा ////