Thursday, May 17, 2012

दिल का मेरे घर जलने वाले...

फरियाद करती हूँ तुझे गमे ए दिल न मिले 
जख्म ए जिगर मुझको दिलाने वाले...
कल तुझको भी कहीं रोना न पड़ जाये 
ऐ  मुझ पे  आज  मुस्कराने  वाले... 
दिल का तेरे चैन बर्बाद न हो पाये
रातों की  नीद मेरी  उड़ने  वाले... 
जग में अपना नाम तो बचाए रखना 
जग को  मुझ पे यूँ  हंसाने  वाले...
फिर कभी किसी से इश्क न करना 
इश्क का आइना मुझको दिखने वाले... 
ख्वावों कि आग न लगाना फिर ऐसी 
दिल का मेरे घर जलने  वाले... 
खता क्या थी मेरी इतना तो बता दे 
दस्तूर इसे दुनियां का बताने वाले..........