Tuesday, October 9, 2012

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मोहब्बत में भी जिंदगी क्या-क्या दिखा देती है

 चंद पलों की मुलाकात ताउम्र- दर्द बना देती है

 जो उपने लिये बना है उससे वर्षों जुदा रखती है

 अपने हो नही सकते उन्हें दिल में बसा देती है ////

AJAY SINGH IIT DELHI

Friday, August 24, 2012

- - - हालत-ए- इन्सां - - -

ऐ खुदा हालत-ए- इन्सां
 इतनी  अजीब  क्यूँ  है
चिरागों की आड़ में भी 
अँधेरा  पलता  क्यूँ  है 

मानव ही मानवता को
बेघर करता रहता है 
चाँद पैसों में ही इमान
इन्सान का बिकता क्यूँ है 

जो पास है उसका तो
मोल  कुछ भी नही ,
जिसे पा नही सकता 
उसे खोने का डर क्यूँ है 

गुजरे पलों  की  याद में 
तलाशते रहते हैं जिन्दगी 
कीमत-ए -वर्तमान पलों
में  इतनी लघुता  क्यूँ है 

इन्सां हर जगह है पर 
इंसानियत की कमी है 
हर  चेहरे  ने  पहना
   इक  नकाब  क्यूँ  है 

Thursday, June 28, 2012

ऐ गम ! जा के ढूंढ़ ले कोई दूसरा घर

ऐ गम ! जा के  ढूंढ़ ले  कोई दूसरा घर  ,
दिल में आज से मेरे , बसेरा उनका होगा ..
 
इस घर का मालिक अब तू नही है ,वो हैं 
खाली अभी तुझे  , घर ये करना होगा ..
 
दीवानगी ने उनकी पागल किया है हमको 
पागलपन का कर्ज तुझको ही भरना होगा ...
 
घर ही तेरा अब ,  बेघर तुझे कर रहा है 
खातिर इस घर की बेघर तुझे रहना होगा ...
 
जिस तन्हाई की छाँव में तू पला-बढ़ा है 
उस तन्हाई को भी साथ तेरे रहना होगा ...
 
दर्द ने भी साथ तेरा  निभाया था अच्छा 
साथ अपने चलने को उसे भी कहना होगा ..
 
गर चले गये "वो "तो फिर याद आयेगा तू ,
मेहमान चंद पलों का,तुझको बनना होगा  ..
 
है नही बेनकाब तो, चेहरा " उनका " भी  
पर्दा हटने का मगर ,इंतजार करना होगा ////

Sunday, June 17, 2012

गर 'वो ' हमारे होते

जिन्दगी हमारी भी बनती एक सवाल 
गर सवाल का जबाब 'वो 'हमारे होते 
उन यादों में ही गुजर लेते उमर सारी
गर दो पल भी 'वो ' साथ हमारे होते ..

भिगोते अश्क पलकों को भी ,गर 
ये नयन उनके मतवारे होते 
जान लेते हकीकत प्यार की हम भी 
जो प्यार का आइना 'वो ' हमारे होते ..

राहों में हमारे होते उजाले अनेक 
जो 'उनके अँधेरे ' हमारे होते 
भूल के उनको सो लेते चैन से 
सपने जो वश में हमारे होते ..

गुनगुना लेते ताउम्र उनको हम 
जो होठों के गीत 'वो' हमारे होते 
कर  लेते ख्वाबों में ही दीदार उनका 
मोहताज 'उनके' ख्वाब हमारे होते ...

हमारे नेताओं की जुबानी


इस सरकार  ने बहुत लूट लिया 
अब हमें इक मौका दो ,
इनकी कसर पूरी करने 
हम तैयार बैठे हैं 


अन्ना जी भ्रष्टाचार का 
एक पेड़ तो उखाड़ो  
दस और पेड़ लगाने को 
हम तैयार बैठे हैं     


कासब ,अफजल शरीखों को 
मरो नही ,हमें सोंप दो 
मेहमानी  इनकी करने 
हम तैयार बैठे हैं


देश प्रेम की एक भी  बात 
करके तो देख लो 
टांग अडाने "ठाकरे जी "
तैयार बैठे हैं.


कलमाड़ी जैसे घोटाले ,तुम 
भी तो करके देखो 
देशभक्त बोलने दिग्विजय 
 
तैयार बैठे हैं


घोटाले के क्षेत्र में भी 
नोबल मिलना चाहिए 
अनेकों नोबल भारत लाने 
हम तैयार बैठे हैं


जेब अपनी थोड़ी और 
टाइट कर लो 
मंहगाई को और बढाने      
हम तैयार बैठे हैं.


देशवासियो चिंता  करो 
अपने दिल थम के बैठो 
नए घोटाले का सरप्राइज  देने 
हम तैयार बैठे हैं.