Saturday, July 16, 2011

-- हम भी सीख जाते --

क्या होता  है ठोकर खाना, सीख जाते
गर किसी ने   हम भी  ठुकराए  होते 
यूँ तो  काट लेते  हम भी जिन्दगी
जीने के  बहाने  जो  पास में  होते
हम भी जीते 'आज में 'ही बेफिक्र होकर
गुजरे पलों में जो खुद की तलाश में न होते
हमारी राहों में भी न होता इतना अँधेरा
उजाले दूसरों के नाम जो किये न  होते
कुछ पल हमारे भी ख़ूबसूरत होते,गर
हर पल की  ख़ुशी की तलाश में न होते
खुद की परवाह हम भी कर पाते,गर
दूसरों की परवाह में लापरवाह न होते
पहचान हम भी सकते थे  हर इन्सान को
हर इन्सां में अगर दस बीस इन्सां न होते
जिन्दगी हमारी भी  संवर जाती शायद
नजरों में जो किसी ने हम भी बसाये होते

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पहाड़ से  गिरे  इन्सां  उठ सकते हैं, मगर
गिर गये जो  नजरों से , उठा  नही करते
कोशिश   हज़ार  कर  ले  बसंत  फिर  भी
सुख गये जो फूल , फिर खिला नही करते
बीते पलों कि याद में यूँ ही गुजर जाती है जिन्दगी
गुजर गये जो पल,वापस  मिला नही करते
यूँ तो टूट जाया करते हैं  बंधन पल भर में,
बिना गांठ पड़े मगर,फिर से जुडा नही करते
धुल जाते  हैं कपड़ों पे लगे धब्बे  आसानी से
चरित्र पे लगे  दाग  मगर, धुला  नही  करते

दूर से कितनी भी हसीन नजर आये दुनिया मगर
हैं सबसे खुबसुरत जो , किसी को मिला नही करते