Wednesday, June 22, 2011

--------एक छोटी सी असफलता के बाद ------

एक छोटी सी असफलता मिली तो क्या
हर बार सफलता भी जरूरी नही होती ,
सूरज कि ऊंचाई पर न पहुँच सके तो क्या
चाँद कि ऊंचाई भी तो कम नही होती ,
एक हसरत पूरी न हो पायी तो क्या हुआ
हसरतें लोगों  की क्या अधूरी नही होती ,
हंसती-हंसती आती है नजर दुनिया तो क्या
हर हंसी के पीछे भी तो ख़ुशी जरूरी नही होती,
हमारा एक पल अच्छा न गुजरा तो क्या हुआ
 हर पल तो जिन्दगी ख़ूबसूरत नही होती ,
बोलकर मुंह से हाल न बता सके तो क्या
कविता क्या बीते पलों की जुबानी नही होती,
 अगर आज हम उदास हैं तो कोई बात नही
उदासी क्या कभी  खुबसुरत नही होती \\\\\