Friday, January 14, 2011

दुनिया में रहा न कोई अपना

इस दुनिया में अब रहा न कोई अपना
अब तो सब अपने भी बेगाने हो गये ,                    
लगने लगा अब तो हमें जैसे - भरी
महफिल  में  भी हम वीराने  हो गये  |

आखों में ख्वाब जो दिखाया करते थे वो
 ही अब हमारे ख्यालों के नज़ारे हो गये ,
जो खाते थे  कसम  दोस्ती निभाने  की
करें क्या जब वो ही दुश्मन हमारे हो गये

विश्वास जताने वालों ही तोडा है विश्वास
तमन्नाओं के तार-तार अब हमारे हो गये
बीच मंझधार में लाके छोड़ दिया है हमको
किश्ती जो बनने चले थे किनारे हो गये  |

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*****उनको कहा गया था कठोर बनने को
कठोर भी ऐसे बने कि पत्थर हो गये !!!!!!

Thursday, January 13, 2011

SHAYRI

चमकती आखों में ख्वाव दिखाया न करो
निभा नही पाते वो कसम खाया न करो ,
जब तोडना ही है तो दिल लगाते क्यों हो
सजा-ए-गम देकर तो तडपाया न करो |


ख्वावों में जीना जब आदत बन जाती है
हकीकत की दुनिया भी ख्वाब नजर आती है
कोई इंतजार करे या न करे ,फिर भी हर पल
ये दुनिया अपने इंतजार में नजर आती है

ख्वावों  की दास्तान भी  अजीब होती है
हकीकत इनसे कोसों दूर होती होती है
ख्वाब देखना ही नही सब कुछ ,कई बार
जिन्दगी भाग्य के हाथों भी मजबूर होती है