Sunday, September 25, 2011

--- आखिर क्या है जिन्दगी ---

कितने कितने रंगों से भरी है जिंदगी 
कभी ख़ुशी तो खाभी गम है जिंदगी,,
कभी  झरनों की तरह बहती है जिंदगी 
कभी पताका बन साहिल तलाशती है जिंदगी 
दुखो और  सुखों का संगम है  जिंदगी
चौराहों पे मासूम सिसकती है जिंदगी,,, 
कभी बसंत तो कभी पतझड़ है जिंदगी 
धुप-कभी छॉंव कभी दिन कभी रात है जिंदगी 
कभी बारिश की  नन्हीं  फुहार है जिंदगी
तो कभी  रेत का  रेगिस्तान है   जिंदगी  ,,,,
कभी नफरत  तो कभी प्यार है जिंदगी 
कभी दिलों में  जली एक आग है जिंदगी 
कोई कहता है '' बेहिसाब '' है जिंदगी 
तो कोई कहता है खुली किताब है जिंदगी ,,,,,
 फूलों से   भरा गुलदस्ता है  जिंदगी 
सुरों से भरा इक वाद्य यन्त्र है जिंदगी 
उदास चेहरे पे इक  मुस्कान है जिंदगी 
दुःख सागर में ख़ुशी की लहर है जिंदगी ,,
कभी दयालु तो कभी क्रूर है  जिन्दगी 
समझ न आया आखिर क्या है जिन्दगी ////

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