Friday, January 14, 2011

दुनिया में रहा न कोई अपना

इस दुनिया में अब रहा न कोई अपना
अब तो सब अपने भी बेगाने हो गये ,                    
लगने लगा अब तो हमें जैसे - भरी
महफिल  में  भी हम वीराने  हो गये  |

आखों में ख्वाब जो दिखाया करते थे वो
 ही अब हमारे ख्यालों के नज़ारे हो गये ,
जो खाते थे  कसम  दोस्ती निभाने  की
करें क्या जब वो ही दुश्मन हमारे हो गये

विश्वास जताने वालों ही तोडा है विश्वास
तमन्नाओं के तार-तार अब हमारे हो गये
बीच मंझधार में लाके छोड़ दिया है हमको
किश्ती जो बनने चले थे किनारे हो गये  |

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*****उनको कहा गया था कठोर बनने को
कठोर भी ऐसे बने कि पत्थर हो गये !!!!!!

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