Sunday, October 23, 2011

- - - - माँ - - - -

कैसे तुझे  बताऊँ माँ कि
याद तेरी यहाँ आती  है
तेरे प्यार की वो दुनियां अब
आँख मेरी भर जाती  है |

भूखी तू रह जाती है पर
खाना मुझे  खिलाती  है
राह का मेरी मिटाने अँधेरा
तू दीपक बन  जाती  है |

घिर जायें हज़ार दुखों से
जब,राह नजर न आती है
गोद तेरी तो उस पल भी माँ
स्वर्ग  धरा  बन  जाती  है |

दया  भाव  की  तू  मूरत
नित शांत नज़र तू आती है
मेरी तो हर भूल को माँ तू
पल में ही  भूल जाती  है  |

अब बदला मैं हू या वक़्त बदल
गया ,पर तू बदल न पाती है
दुनिया तेरी वो,अब मेरा एक
ख्वाब  बनकर रह जाती  है |

भागदौड़  में  अब  मेरी  ये
जिंदगी  खत्म  हो जाती है
मंजिल ये दूर ले न जाये तुझसे
ये  चिंता  मुझे  सताती  है  |

यूँ तो  सुख हैं  हजारों यहाँ  पे
पर तेरी कमी न पूरी हो पाती है
बिन तेरे, खिली कली  मन की 
मेरी, पल में  मुरझा जाती  है |

कैसे  करू  नमन  तेरा  माँ
कोई  राह  नज़र  न आती है
मूरत  में  भागवान  के  तेरी
सूरत  नज़र  अब  आती  है
सूरत नज़र अब आती है |||||

Sunday, September 25, 2011

--- आखिर क्या है जिन्दगी ---

कितने कितने रंगों से भरी है जिंदगी 
कभी ख़ुशी तो खाभी गम है जिंदगी,,
कभी  झरनों की तरह बहती है जिंदगी 
कभी पताका बन साहिल तलाशती है जिंदगी 
दुखो और  सुखों का संगम है  जिंदगी
चौराहों पे मासूम सिसकती है जिंदगी,,, 
कभी बसंत तो कभी पतझड़ है जिंदगी 
धुप-कभी छॉंव कभी दिन कभी रात है जिंदगी 
कभी बारिश की  नन्हीं  फुहार है जिंदगी
तो कभी  रेत का  रेगिस्तान है   जिंदगी  ,,,,
कभी नफरत  तो कभी प्यार है जिंदगी 
कभी दिलों में  जली एक आग है जिंदगी 
कोई कहता है '' बेहिसाब '' है जिंदगी 
तो कोई कहता है खुली किताब है जिंदगी ,,,,,
 फूलों से   भरा गुलदस्ता है  जिंदगी 
सुरों से भरा इक वाद्य यन्त्र है जिंदगी 
उदास चेहरे पे इक  मुस्कान है जिंदगी 
दुःख सागर में ख़ुशी की लहर है जिंदगी ,,
कभी दयालु तो कभी क्रूर है  जिन्दगी 
समझ न आया आखिर क्या है जिन्दगी ////

Saturday, July 16, 2011

-- हम भी सीख जाते --

क्या होता  है ठोकर खाना, सीख जाते
गर किसी ने   हम भी  ठुकराए  होते 
यूँ तो  काट लेते  हम भी जिन्दगी
जीने के  बहाने  जो  पास में  होते
हम भी जीते 'आज में 'ही बेफिक्र होकर
गुजरे पलों में जो खुद की तलाश में न होते
हमारी राहों में भी न होता इतना अँधेरा
उजाले दूसरों के नाम जो किये न  होते
कुछ पल हमारे भी ख़ूबसूरत होते,गर
हर पल की  ख़ुशी की तलाश में न होते
खुद की परवाह हम भी कर पाते,गर
दूसरों की परवाह में लापरवाह न होते
पहचान हम भी सकते थे  हर इन्सान को
हर इन्सां में अगर दस बीस इन्सां न होते
जिन्दगी हमारी भी  संवर जाती शायद
नजरों में जो किसी ने हम भी बसाये होते

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पहाड़ से  गिरे  इन्सां  उठ सकते हैं, मगर
गिर गये जो  नजरों से , उठा  नही करते
कोशिश   हज़ार  कर  ले  बसंत  फिर  भी
सुख गये जो फूल , फिर खिला नही करते
बीते पलों कि याद में यूँ ही गुजर जाती है जिन्दगी
गुजर गये जो पल,वापस  मिला नही करते
यूँ तो टूट जाया करते हैं  बंधन पल भर में,
बिना गांठ पड़े मगर,फिर से जुडा नही करते
धुल जाते  हैं कपड़ों पे लगे धब्बे  आसानी से
चरित्र पे लगे  दाग  मगर, धुला  नही  करते

दूर से कितनी भी हसीन नजर आये दुनिया मगर
हैं सबसे खुबसुरत जो , किसी को मिला नही करते

Wednesday, June 22, 2011

--------एक छोटी सी असफलता के बाद ------

एक छोटी सी असफलता मिली तो क्या
हर बार सफलता भी जरूरी नही होती ,
सूरज कि ऊंचाई पर न पहुँच सके तो क्या
चाँद कि ऊंचाई भी तो कम नही होती ,
एक हसरत पूरी न हो पायी तो क्या हुआ
हसरतें लोगों  की क्या अधूरी नही होती ,
हंसती-हंसती आती है नजर दुनिया तो क्या
हर हंसी के पीछे भी तो ख़ुशी जरूरी नही होती,
हमारा एक पल अच्छा न गुजरा तो क्या हुआ
 हर पल तो जिन्दगी ख़ूबसूरत नही होती ,
बोलकर मुंह से हाल न बता सके तो क्या
कविता क्या बीते पलों की जुबानी नही होती,
 अगर आज हम उदास हैं तो कोई बात नही
उदासी क्या कभी  खुबसुरत नही होती \\\\\

Saturday, March 12, 2011

----- हमारे देश में महिलाओं की स्थिति ------

 आजकल दिल्ली  में लडकियों की हत्या  एक आम बात बन गयी है |
वाह !! हमारे देश की राजधानी कहे जाने वाले शहर दिल्ली |
आज हमारे देश में लडकी सर उठा के नही चल सकती है 
शायद अब हमारे देश में महिलाओं  को यह अधिकार ही नही रहा है |
वाह हमारे देश के कानून और हमारे देश की सुरक्षा  व्यव्व्स्था \
हमारे देश में अफजल और कासब जैसे लोगो को तो जीने का पूरा अधिकार है 
उनके लिए पूरी सुरक्षा भी उपलब्ध है पर हमारे देश में महिलाओं की स्थिति 
तो देखने ही लायक है |
पिछले कुछ दिनों से अख़बारों में पढने को बहुत मिला ------
आरुशी मर्डर केश ,,,,,
राधिका तंवर, बी.ए. दूसरे वर्ष की छात्रा की , Ramlal आनंद कॉलेज के बाहर हत्या कर दी गई |
एक जवान लड़की  की दिनदहाड़े कॉलेज में हत्या |
 एक बुजुर्ग महिला की उसके घर में गला रेतकर  हत्या कर दी गई,
  एक गृहिणी रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाई गयी | 
 दक्षिण पश्चिम दिल्ली में एक किशोर लड़की की हत्या |
इन सब बातों का शायद उन लोगों पर अशर न पड़े जो आराम से कुर्शी पर बैठे हैं या जो 
सुरक्षा के झूठे दावे देते हैं पर उन लोगों पर जरुर असर पड़ता है जिनके जिगर का टुकड़ा उनसे
छिन जाता है या जिनके परिवार का सदस्य उनसे हमेशा हमेशा के लिए अलग हो जाये |

अभी तक मुझे नही लगता की कोई एसा सख्त कदम उठाया गया है जिससे ऐसे घिनोने 
कर्म करने वाले पापियों को ऐसी सजा मिल सके ताकि कोई फिर ऐसा कर्म करने की भी 
न सोचे |
खैर हमारे देश का कानून इतनी जल्दी किसी बात की खबर नही लेता है |यही हमारा 
देश है जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है |

Wednesday, February 9, 2011

A REAL STORY

एक समय की बात है एक दंपत्ति ने बड़ी उम्मीद से अपने आंगन में यह सोचकर  एक पेड़ लगाया था कि कभी बड़ा होकर वह पेड़ उनके आंगन को हरा-भरा बनाएगा |पेड़ जब छोटा था तो अती सुन्दर लगता था |
उसमे प्यारी प्यारी कोंपलें खिली  थीं देखने में वेचारा प्रतीत होता था |उन लोगों ने उसमे कई साल तक खाद बीज और पानी दिया |पेड़ भी दिन दूनी रात चौगुनी दर से बढ़ने लगा

खैर यह क्रम ज्यादा नही चल सका एक मुश्किल घड़ी के समय  दम्पत्ति को ही उस पेड़ कि हरी -भरी डालियों पर कुल्हाड़ी चलानी पड़ी ,और इस प्रकार उस पेड़ को के ठूंठ में बदल दिया गया | काटते समय  कई बार उसने तडफडाकर यह व्यक्त भी करना चाह कि उसे न कटा जाये लेकिन सब व्यर्थ था |फिर  पेड़ यह सब शंतोचित्त भाव से देखता हुआ,अपनी भावनाओं पर अंकुश लगाते हुए सब कुछ  सहन करता रहा

     खैर बेचारा पेड़  करता भी क्या ,कुछ दिन तक ज्यों का त्यों ठूंठ बनकर खड़ा रहा |लेकिन  अब भी उस आंगन को बनाने के इरादे उसके मन में प्रवलता से बने हुए थे |
कुछ समय बीता ,एक दिन फिर से उस ठूंठ में नयी कोपलें खिलने लगीं |तने क़ी मुख्या शाखा जो कटी गयी थी उसकी साइड से एक नयी शाखा निकली जो पहली शाखा से भो ज्यादा सुन्दर लगती थी |इस बार मालिक ने उसे बढने क़ी इजाजत दे दी और वह शाखा नये पेड़ क़ी भांति दिन दूनी रात चौगुनी दर से बढने लगी |इस दौरान कई बार आंधियां चलीं ,बिजली गिरी ,तेज बारिश हुई ,तूफ़ान आया ,पतझड़ आया लेकिन वह डाली इस बार अपने आप को एक विशाल और मजबूत पेड़ क़ी भांति स्थापित करने में सफल रही |अब उस पेड़ क़ी जड़ें उस आँगन में इस कदर फ़ैल गयीं कि अब वह चाहकर भी उस आँगन से अलग नही हो सकता था |
आखिर एक दिन बसंत आया, वे दंपत्ति उस पेड़ कि छाँव में बैठकर उन पुराने दिनों को याद कर रहे थे |पेड़ भी उनको  देखकर मन ही मन काफी खुश हो रहा था |अब मालिक उस पेड़ को उतना ही प्यार देता जितने
प्यार से उसने उसे लगया ,सींच कर बड़ा किया था |और एक बार फिर से वह दंपत्ति उसी पेड़ से अपने आंगन के हरा भरा होने कि उम्मीद लगाये बैठा है |'----------------

Tuesday, February 8, 2011

ऐ खुदा   इस  जहाँ   में   तेरे ,
            कोई  हँसता ,कोई   रोता   क्यों ,,

इन्सान -इन्सान  सब  एक  समान  हैं  तो  फिर
            उंच -नीच   जाति-भेद  क्यों

इन्सान  तो  सब  तेरी  ही  सन्तान  हैं  फिर ,
            कोई  वारिस  कोई  लावारिस  क्यों ,,

तुने  ये  पेट  तो  सबको  दिया  हैं  फिर ,
            किसी  को  खाना  कोई  भूखा  क्यों ,,

दुनिया  में  कुछ  तेरा -मेरा  नही  फिर
            कोई  धनी कोई  गरीब  क्यों ,,

इन्सान  तो   हर  जगह  पर  है  फिर  ,
            इंसानियत   की   कमी   क्यों  ??


one day my friend asked me


"Why do we have many temple
if god is everywhere ?"


I Answered


"Why humanity is not  everywhere
       if human is everywhere"

He asked

"Why do you have fan to feel
   if air is everywhere ?"


I told


"Why somewhere Dry somewhere rain
    if cloud is everywhere ?"

Friday, January 14, 2011

दुनिया में रहा न कोई अपना

इस दुनिया में अब रहा न कोई अपना
अब तो सब अपने भी बेगाने हो गये ,                    
लगने लगा अब तो हमें जैसे - भरी
महफिल  में  भी हम वीराने  हो गये  |

आखों में ख्वाब जो दिखाया करते थे वो
 ही अब हमारे ख्यालों के नज़ारे हो गये ,
जो खाते थे  कसम  दोस्ती निभाने  की
करें क्या जब वो ही दुश्मन हमारे हो गये

विश्वास जताने वालों ही तोडा है विश्वास
तमन्नाओं के तार-तार अब हमारे हो गये
बीच मंझधार में लाके छोड़ दिया है हमको
किश्ती जो बनने चले थे किनारे हो गये  |

#####
*****उनको कहा गया था कठोर बनने को
कठोर भी ऐसे बने कि पत्थर हो गये !!!!!!

Thursday, January 13, 2011

SHAYRI

चमकती आखों में ख्वाव दिखाया न करो
निभा नही पाते वो कसम खाया न करो ,
जब तोडना ही है तो दिल लगाते क्यों हो
सजा-ए-गम देकर तो तडपाया न करो |


ख्वावों में जीना जब आदत बन जाती है
हकीकत की दुनिया भी ख्वाब नजर आती है
कोई इंतजार करे या न करे ,फिर भी हर पल
ये दुनिया अपने इंतजार में नजर आती है

ख्वावों  की दास्तान भी  अजीब होती है
हकीकत इनसे कोसों दूर होती होती है
ख्वाब देखना ही नही सब कुछ ,कई बार
जिन्दगी भाग्य के हाथों भी मजबूर होती है

Monday, January 3, 2011

str

vo seen dekhkr meri aankhen dabdba gy.vakai yh seen mere liye kafi ajeeb aur rochk tha .
maine mere prti to kbhi ese seen ki klpna bhi nhi ki thi.main nhi janta tha ki
 perents aur santan me itna pyar bhi hota h.

Aaj iitd me mera phla din tha.me hostel k bahr khda tha ki ek car vha aakr ruki.
usme se ek ldka aur perhaps uske mata pita nikle.shayd uske mata pita use
 chhodne aye the.jb ve use chhod k laut rhe the to unki aakhon me nmi clear jhlk rhi thi
ab unke aansu roke nhi ruk rhe the.ldka bhi apni man ki god me sr rkhkr nanhe balk ki
trh ro rho tha.me bhi ek pl k liye sochne lga kash m bhi esa hota.khair,

is seen ko dhekkr mujhe kuchh yaad aaya -----

Ek ldka tha jiske parivar valo n uski 10vi pass hone k baad aarthik karna k chlte
padhne se rok diya,bechara mn hi mn ghuta rha lekin usne bhi mn ki baat mn m hi daba li.
jaise taise kisi tkniki snthAN ME DO SAAL GUJARE lekin isi dauran jb usne iit k bare m
suna to uske dimag m bhi ek kida hlchl mchane lga.ab to usne than hi liya ki kuchh bhi
 ho jaye ab vo padhai krega aur iit m intrence k liye apni ji-jan jhonk dega.prntu
jb usne ghr valon k liye btaya kivh study krna chahta h to ghr valon ki ummidon p pani fir
gya ve sochte the ki ab to vh khi job krega aur ghr k halat sudhrenge.
ghr valon ko kafi jabrdsti raji kr k usne gfhr se 50 km door sthit ek srkari schol m prvesh
le liya aur vhi room lekr rhne lga.ab 11vi kkshya me kuchh khas nhi kr para kyon ki is
dauran health ek din bhi thik nhi rha.ab 12vi class k liye usne ek niji school me pravesh
le liya.is dauran khoob bhagdaud ki,padhai k liye din-rat ek kr di.iitjee ka farm bhr diya
gya.lekin 12vo k exams se das din phle se hi uska health jabab dene lga.exam tk aate-2
uski tabiyat bhut jyaya khrab ho gyi antat: usne exams n dene ki soch li lekin ke teacher
ne exam dene ki jbrdsti ki aur evryday use exam center tk le jakr exam dilvaye.
ab iit k exam ki baat thi salect n hona to phle hi tay hochuka tha pr exam dekr to dekha hi
.exam me bahut se que ko to type bhi smjh nhi aaya.ab ghr aake ghr valo ko btaya ki vh jee
ki taiyari k liye koi sansthan join krna chahta h lekin moti fees chukana itnna aasan nhi tha
so ghr valon ka jabab clear tha.ab to vh ldka bhut jyada udas rhne laga.kreeb 20 din tk
ghrvalon se bolna-chalna hi chhod diya.bhut jyada jbrdsti krne pr aakhir use manjuri mil hi gyi
.ab vo kota jakr institute join krke ins se 6-7 km door rhne lga.ab ins jane m khana bnane m
kafi time khrab hota lekin shesh time ko uchit dhang se padhai m puri trh jut gya.
is bar iit ka exam dekr kafi khush tha lekn ab tk vh ghr valon se puri tarh juda ho chuka
tha ,ghr ki eco condition bhi khrab ho chuki thi.so vh faridabad jakar ek compny m job krne
lga.lekin 26 may ka din uski duniya ka sbse khushnanib din tha is din jee ka result aaya
tha jo ki uske liye sare jhan ki khushiyan samet kr laya tha.lekin ab tk bahut der bhi ho
chuki thi utni khushi nhi mili jitni milni chahiye thi.aur ghr parivar ki taraf se to bilkul
dhyan ht sa gya tha.
Lekin 21 july 2010 ko jb vo seen dekha to meri bhi aakhen nm si hone lgi aur aakhir
apne mn ki baat ko in kagj k tukdon pr vyakt kr hi dala.
KAHA BHI GYA H ANT BHALA TO SB BHALA.AUR AB M AUR MERE PARIVAR VALE DONO HI KHUSH H.