Wednesday, December 8, 2010

तेरे साथ हैं हम

तेरा जहाँ नही है सूना 
अभी तेरा जहाँ हैं हम 
तुझे मंजिल जरूर मिलेगी 
तेरी आखें क्यों हैं नम 



तुने हमें बहुत कुछ सिखाया 
तभी मंजिल प़ा सके हैं हम 
अब बारी है तेरी मंजिल की 
उसे भी हासिल कराएंगे हम


                                                                                                  

                                                                                             परिस्थिति हजार आयें जीवन में
डटे रहो जब तक है दम में दम
तेरे कठिनाई भरे जीवन में
साथ  तेरा  निभाएँगे  हम  







                                                                     रखना  होंसले अपने बुलंद
                                                                     मंजिल पा के ही लेना है दम 
                                                                     तुझे वहां तक हम  पहुंचाएंगे 
                                                                     रास्ता तेरा बनेंगे हम 

 जिन्दगी है  जैसे  एक पताका
तैरना भी है और पानी है कम 
साहिल  तो तुझे  ही बनना है 
पतवार  तेरी  बनेंगे  हम 

                                                                       गर खुदा हौंसले अजमाये
                                                                       हिम्मत पड़ने न देना कम 
                                                                      हौसले बुलंद करेंगे तेरे 
                                                                      साहस तेरा बढ़ाएंगे हम 

भावनाओं को तेरी ठेस न पहुंचे 
भरे न तेरे  दिल में और जख्म 
दर्द न तुझको होने देंगे 
बनेंगे तेरे लिए मरहम


तेरी राह में जब हो अँधेरा 
दीपक की लौ बनेंगे हम 
तुझे न मिलने देंगे कोई गम 
तेरे गम सहेंगे हम 

मैं बनके दीपक जीवन का तेरे 
यूँ ही मिटाता रहूँगा तम
हमेशा यही सोचकर चलना 
हम कसी से नही हैं कम                  --------       तेरे साथ हैं हम 

टूटा दिल

कैसे तुम्हें बताऊँ मैं जो टूटा मेरा दिल है
खाते तरस यदि जानते कि क्या मेरी मुश्किल है 
मैंने सोचा मैं  हूँ किश्ती तू मेरा साहिल है 
पर न थी खबर मुझे कि तू ही मेरा कातिल है 
तुझसे दिल लगा के मुझको क्या हुआ हासिल है 
दिल पर जुल्म ढहाने वालों में तू ही शामिल है 
जन न पाया तुझको मैं कि तू न मेरे काबिल है
 मेरी जिन्दगी में अब चरों तरफ गमों कि ही महफ़िल है 
अब होश मुझे जब आया  खुद का तो आंख मेरी बोझिल है 
देर से सही अब सोच रहा हूँ कि कहाँ मेरी मंजिल है 

ताकत कलम की

क्यूँ रखूं  अपनी कलम में  स्याही ,,
जब कलम से कुछ लिख सकता ही नही .
न जाने क्यों व्यर्थ की कोशिश करता हूँ
जब कवि या लेखक बन सकता ही नही.
चाहता हूँ बहुत सरे उपन्यास लिखूं पर
चेतन भगत या कमल झा तो बन सकता नही.
दिल करता है सारे ग़मों को ही लिख डालूं,,
 पर मेरे ग़मों की खबर किसी को है ही नही.
चाहता हूँ  खुदा  के बारे में जिक्र करूँ ,,
पर सुना है वो तो किसी को मिलता ही नही.
डूबती किश्ती पर तो लिख ही क्या सकता हूँ
जब किश्ती किसी तूफां सेब गुजरी ही नही ..
ताकत तो बहुत है मेरी कलम में  पर शायद ,,
मेरे पास मेरी भावनाओं की कोई क़द्र ही नही //    

फरियाद

ऐ खुदा तुझसे मेरी भी एक फरियाद है 
जाकर कह दे उसे वो मुझे आज भी याद है 
ये आजाद अपना सब कुछ छोडकर 
अब उसी के लिए तो बर्बाद है

जाकर सुना दे उसे मेरे दिल का अफसाना 
यादों में तेरी तडपता है आज भी ये दीवाना
पहले तो फ़िदा  था ही उसपे ,लेकिन आज 
मरता है उसपे जैसे "शम्मा पे कोई परवाना"

हर सुबह शाम उसे अब भी याद करता हूँ 
उसके लिए जीता था उसके लिए ही मरता हूँ 
उसने की है बेवफाई तो क्या हुआ 
में तो आज भी उससे वफा करता हूँ 

तन्हाई मुझे आज भी सताती है 
याद उसकी जब -जब मुझे आती है 
नीद चैन सब खो गया है मेरा 
वस ख्वावों में ही रात बीत जाती है 

में चाहकर भी उसे नही भूल पाया हूँ 
उसे भुलाने उसी को ही याद करता हूँ 
जानता हूँ नही होगा दीदार अब उसका
फिर भी उसके दीदार को तरसता हूँ 

जिसे मैंने दिल दिया

चेहरे पे क्या नूर था और
 आखों में क्या चमक थी उसके
पहली बार जब देखा उसको
 कदमों में दिल बिछाया था उसके 
चेहरा जैसे कमल हो उसका 
नयन थे जैसे मोती उसके 
सुरीली आवाज कर कोमल 
चेहरे के भाव अजीब थे उसके 

सामने जब आकर बेठी मेरे 
नैनों में नैन डाले थे उसके 
बोलना था शायद उसको कुछ 
इसीलिए होठ कांपे थे उसके 

पास मैं जब आया था उसके 
ख्यालों में खो गया था उसके 
पहले किसी को देखा न था ऐसे
जितना आज करीब था उसके 

सब कुछ खो बैठा  था मैं अपना 
आखों में मेरी सपने थे उसके 
लेकिन खुदा कि मर्जी को बदलना 
मेरे वस में था न वस में था उसके 

फिर एक दिन सजकर बारात 
लेने उसे घर आई थी उसके 
दिल फूट -फूट कर रोया था 
हाथों में मेंहदी लगी जब उसके 

जानता  हूँ दिल में बसी वो मेरे 
आखों में नमी तो होगी ही  उसके 
दीदार नही हो पाता है अब उसका 
पर तरसते हैं नैन दीदार को उसके