Wednesday, December 8, 2010

फरियाद

ऐ खुदा तुझसे मेरी भी एक फरियाद है 
जाकर कह दे उसे वो मुझे आज भी याद है 
ये आजाद अपना सब कुछ छोडकर 
अब उसी के लिए तो बर्बाद है

जाकर सुना दे उसे मेरे दिल का अफसाना 
यादों में तेरी तडपता है आज भी ये दीवाना
पहले तो फ़िदा  था ही उसपे ,लेकिन आज 
मरता है उसपे जैसे "शम्मा पे कोई परवाना"

हर सुबह शाम उसे अब भी याद करता हूँ 
उसके लिए जीता था उसके लिए ही मरता हूँ 
उसने की है बेवफाई तो क्या हुआ 
में तो आज भी उससे वफा करता हूँ 

तन्हाई मुझे आज भी सताती है 
याद उसकी जब -जब मुझे आती है 
नीद चैन सब खो गया है मेरा 
वस ख्वावों में ही रात बीत जाती है 

में चाहकर भी उसे नही भूल पाया हूँ 
उसे भुलाने उसी को ही याद करता हूँ 
जानता हूँ नही होगा दीदार अब उसका
फिर भी उसके दीदार को तरसता हूँ 

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